मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
हितोपदेश • अध्याय 5 • श्लोक 4
अपरं च । सुहृदां हितकामानां यो वाक्यं नाभिनन्दति । स कूर्म इव दुर्बुद्धिः काष्ठाद्भ्रष्टो विनश्यति ॥
इसके अलावा, वह मूर्ख व्यक्ति (दुष्ट बुद्धि का), जो अपने मित्रों की सलाह का अनुमोदन नहीं करता है, जिनके दिल में उसका कल्याण है, वह लकड़ी के टुकड़े से गिरे हुए मूर्ख कछुए की तरह नष्ट हो जाता है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
हितोपदेश के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

हितोपदेश के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें