जमदग्नेः सुतस्येव सर्वः सर्वत्र सर्वदा ।
अनेकयुद्धजयिनः प्रतापादेव भुज्यते ॥
अनेक युद्धों में विजयी रहे व्यक्ति के पराक्रम से, जैसे कि परशुराम (जमदग्नि के पुत्र) के पराक्रम से, प्रत्येक व्यक्ति को हर जगह और हर समय (अपनी इच्छाओं के अधीन) बनाया जाता है।
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