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हितोपदेश • अध्याय 5 • श्लोक 31
संहतत्वाद्यथा वेणुर्निबिडैः कण्टकैर्वृतः । न शक्यते समुच्छेत्तुं भ्रातृसंघातवांस्तथा ॥
जिस प्रकार काँटों से ढका हुआ बाँस (आसानी से) अन्य लोगों के साथ घनिष्ठ संबंध होने पर नहीं उखाड़ा जा सकता, उसी प्रकार अनेक रिश्तेदारों के साथ रहने पर कोई भी नहीं उखाड़ सकता।
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