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हितोपदेश • अध्याय 5 • श्लोक 142
काळेवंशसमुत्पन्नेन रामचंद्रसूनुना मोरेश्वरेण कृता मर्मप्रकाशिका नाम हितोपदेशव्याख्या समाप्ता । शुभं भूयादध्यापकानामध्येतॄणां च ।
यह काले वंश के रामचन्द्र के पुत्र भगवान मोरेश्वर द्वारा किया गया था। यह हितोपदेश की संपूर्ण व्याख्या है, जिसे मर्मप्रकाशिका कहा जाता है। शिक्षकों और मध्यस्थों के लिए यह शुभ रहेगा।
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