मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
हितोपदेश • अध्याय 5 • श्लोक 132
अभियोक्ता बलीयस्त्वादलब्ध्वा न निवर्तते । उपहारादृते तस्मात्संधिरन्यो न विद्यते ॥
(सफल) आक्रमणकारी (विजेता) अधिक शक्तिशाली होने के कारण बिना कुछ प्राप्त किये वापस नहीं लौटता; इसलिए उपाहार के अलावा समधी की कोई अन्य विधा नहीं है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
हितोपदेश के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

हितोपदेश के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें