यावदायुः प्रमाणस्तु समानार्थप्रयोजनः ।
संपत्तौ वा विपत्तौ वा कारणैर्यो न भिद्यते ॥
जीवन की लम्बाई का प्रमाण इसी प्रयोजन के लिए है। चाहे धन में हो या विपत्ति में, वह कारणों से अलग नहीं होता।
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