अतः महाराज, यदि आपको मेरी सलाह माननी है तो संधि करके ही जाना चाहिए। क्योंकि अभीष्ट वस्तु की सिद्धि के लिए यद्यपि चार साधन बताये गये हैं, तथापि उनका उपयोग केवल संख्या बनाने के लिये ही होता है; वास्तविक सफलता शांति पर ही टिकी हुई है।
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