फिर सुबह जाल में फंसने पर प्रत्युत्पन्नमति ने खुद को मरा हुआ बता दिया और वहीं रुक गई। इसके बाद जाल से निकाले जाने पर उसने अपनी पूरी शक्ति से छलांग लगाई और गहरे पानी में चला गया। जबकि यद्भविष्य मछुआरों द्वारा पकड़े जाने पर मारा गया। इसलिए मैं कहता हूं - अनागतविधाता। इसलिए ऐसा उपाय करो कि मैं आज दूसरे तालाब तक पहुँच जाऊँ। दोनों हंसों ने कहा - जब दूसरा तालाब पहुँच जायेगा तो तुम सुरक्षित रहोगे। लेकिन ज़मीन पर जाते समय आपकी सुरक्षा के साधन क्या होंगे (या, आपका किराया कैसा होगा)? कछुए ने उत्तर दिया - कोई ऐसा साधन खोजो जिससे मैं तुम्हारे साथ हवाई मार्ग से चल सकूं। दोनों हंसों ने कहा - ऐसी युक्ति कैसे संभव हो सकती है? कछुए ने उत्तर दिया - तुम अपनी चोंच में लकड़ी का एक टुकड़ा ले लो जिसे मैं अपने मुंह से पकड़ लूंगा, ताकि मैं भी तुम्हारे पंखों के बल से आसानी से निकल जाऊं। दो हंसों ने कहा - यह युक्ति संभव है। परन्तु बुद्धिमान मनुष्य को उपाय सोचते समय दुर्घटना (अथवा संभावित विघ्न-बाधा) का भी ध्यान रखना चाहिए। एक मूर्ख सारस के बच्चों को नेवले ने उसकी आँखों के सामने खा लिया।
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