शत्रु के किसी रिश्तेदार द्वारा शत्रु को परास्त करने से बढ़कर कोई नीतिगत चतुराईपूर्ण कदम नहीं है। इसलिए, व्यक्ति को हर तरह से अपने शत्रु के किसी रिश्तेदार को उसके विरुद्ध खड़ा करना चाहिए।
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