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हितोपदेश • अध्याय 4 • श्लोक 89
वरमल्पबलं सारं न कुर्यान्मुण्डमण्डलीम् । कुर्यादसारभङ्गो हि सारभङ्गमपि स्फुटम् ॥
बहुत सारे मुखियाओं की अपेक्षा चुने हुए लोगों की एक छोटी सेना रखना बेहतर है। क्योंकि कमज़ोर की हार ज़ाहिर तौर पर ताकतवर की हार का कारण बनेगी।
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