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हितोपदेश • अध्याय 4 • श्लोक 8
राजा विहस्याह -- आत्मनश्च परेषां च यः समीक्ष्य बलाबलम् । अन्तरं नैव जानाति स तिरस्क्रियतेऽरिभिः ॥
राजा मुस्कुराए और बोले - जो अपनी और अपने शत्रुओं की शक्ति या कमजोरी पर भली-भांति विचार करके भी उनमें अंतर नहीं पहचान पाता, वह शत्रुओं द्वारा तुच्छ समझा जाता है।
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