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हितोपदेश • अध्याय 4 • श्लोक 17
अधीतव्यवहाराङ्गं मौलं ख्यातं विपश्चितम् । अर्थस्योत्पादकं सम्यग्विदध्यान्मन्त्रिणं नृपः ॥
जो शुद्ध और परखा हुआ ईमानदार हो, जो अच्छा परामर्शदाता हो, जो दुर्गुणों का आदी न हो और सही रास्ते से न भटकता हो, जिसने विवादों से संबंधित कानून में महारत हासिल कर ली हो, जो वंशानुगत, प्रतिष्ठित, विद्वान और राजस्व जुटाने में विशेषज्ञ हो।
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