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हितोपदेश • अध्याय 4 • श्लोक 149
यत्र यत्र हतः शूरः शत्रुभिः परिवेष्टितः । अक्षयांल्लभते लोकान्यदि क्लैब्यं न गच्छति ॥
शत्रुओं से घिरा हुआ वीर पुरुष जहाँ भी मारा जाता है, यदि वह युद्ध में दुर्बलता (कायरता) न दिखाए तो उसे अनन्त लोकों की प्राप्ति होती है।
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