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हितोपदेश • अध्याय 4 • श्लोक 132
यतः । धूर्तः स्त्री वा शिशुर्यस्य मन्त्रिणः स्युर्महीपतेः । अनीतिपवनक्षिप्तः कार्याब्धौ स निमज्जति ॥
क्योंकि, जिस राजा के पास दुष्ट, स्त्री या बालक होता है, वह राज्य-व्यापार के सागर में डूब जाता है और गलत नीति की आंधी में डूब जाता है।
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