इस कारण मैं भी चुप रहा। इस पर राजा ने हाथ जोड़कर कहा - महाराज, यह दोष मेरा ही माना जाय। अब आप मुझे ऐसा उपदेश दीजिये कि मैं अपनी बची हुई सेना को लेकर विन्ध्य पर्वत पर लौट जाऊँ। गिद्ध ने मन ही मन कहा - इसका उपाय तो करना ही पड़ेगा। क्योंकि देवताओं, गुरु, गौओं, राजाओं, ब्राह्मणों तथा बालकों, बूढ़ों तथा रोगी व्यक्तियों के मामले में क्रोध पर सदैव संयम रखना चाहिए।
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