इस कारण हमारे सेनापति दिन-रात उस लापरवाह (शाब्दिक भूल करने वाले) राजा की शक्ति को अवसर के अनुसार नष्ट करते रहें। ऐसा करने पर चित्रवर्ण के कई सैनिक और सेनापति मारे गये। इस पर चित्रवर्ण ने निराश होकर अपने मंत्री दुरादर्शी से कहा--महोदय, आप हमारी उपेक्षा क्यों करते हैं? क्या मैंने किसी मामले में आपके साथ बदतमीजी (अपमान) की है? इसके लिए कहा गया है - किसी को केवल इसलिए अनुचित तरीके से कार्य नहीं करना चाहिए क्योंकि उसने राज्य प्राप्त कर लिया है; क्योंकि उद्दंडता (शाब्दिक रूप से शील की चाह) धन को वैसे ही नष्ट कर देती है जैसे बुढ़ापा उत्कृष्ट सुंदरता को नष्ट कर देता है।
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