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हितोपदेश • अध्याय 3 • श्लोक 93
एतच्च राज्ञे प्रधानं दूषणम् । अतिव्ययोऽनपेक्षा च तथार्जनमधर्मतः । मोषणं दूरसंस्थानं कोषव्यसनमुच्यते ॥
और यह किसी राज्य के प्रशासन में मुख्य दोष है। अत्यधिक व्यय, पर्यवेक्षण की कमी, साथ ही अनुचित तरीकों से धन जुटाना, लूटपाट और दूर की स्थिति - ये राजकोष की बुराइयाँ हैं।
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