कराटक ने पूछा कि यह कैसा था। दमनक ने कहा - उत्तरी क्षेत्र में अर्बुदशिखर नामक पर्वत पर महाविक्रम नाम का एक सिंह रहता था। जब वह अपनी पहाड़ी मांद में सो रहा था तो एक चूहे ने उसकी जटाओं को कुतर डाला। फिर अपनी जटाओं के सिरे कटे हुए देखकर उसे क्रोध आया, परंतु अपने बिल में छिपे चूहे को न पकड़ पाने पर उसने विचार किया - जब कोई शत्रु महत्वहीन हो और उसे वीरता से नहीं जीता जा सकता हो, तो उसे मारने के लिए उसके ही वर्ग के किसी योद्धा को आगे बढ़ाना चाहिए।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
हितोपदेश के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
हितोपदेश के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।