पिंगलक ने कहा - प्रिय दमनक, तुम ऐसा क्यों बोलते हो? आप, हमारे प्रधान मंत्री के पुत्र, किसी दुष्ट की बातों पर विश्वास करके इतने लंबे समय तक यहाँ नहीं आए। अब खुलकर अपनी बात कहें। दमनक ने कहा - प्रभु, मुझे एक प्रश्न पूछना है। कृपया उत्तर दें। मेरे स्वामी प्यासे होने पर भी बिना पानी पिए आश्चर्यचकित होकर यहाँ क्यों खड़े हैं? पिंगलक ने उत्तर दिया - आपने अच्छी बात कही। लेकिन ऐसा कोई भरोसेमंद नहीं है जिसके पास ये राज़ सिमटा रह सके। आप एक ऐसे व्यक्ति हैं। इसलिए मैं इसे आपको बताऊंगा। सुनना। इस जंगल में अब किसी ऐसे जानवर का निवास हो गया है, जो पहले कभी नहीं सुना गया था, और इस कारण से, हमें इसे छोड़ देना चाहिए। मैं इस कारण उलझन में हूं। इसी तरह आपने भी वो अजीब तेज़ आवाज़ सुनी होगी। इस जानवर की ताकत उसकी आवाज के अनुरूप होनी चाहिए। दमनक ने उत्तर दिया - महाराज, यह सचमुच भय का एक बड़ा कारण है। हमने भी आवाज सुनी है लेकिन वह एक बुरा मंत्री है जो पहले जमीन छोड़ने और फिर लड़ाई की सलाह देता है। इस संकट में जब यह जानना मुश्किल है कि क्या कदम उठाया जाए, तो नौकरों की ही उपयोगिता जाननी होगी। क्योंकि, मनुष्य विपत्ति की कसौटी पर अपने रिश्तेदारों, पत्नी और नौकरों की शक्ति के साथ-साथ अपनी बुद्धि और मानसिक क्षमता को भी जानता (परखता) है।
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