यतः । स्थान एव नियोज्यन्ते भृत्याश्चाभरणानि च ।
न हि चूडामणिः पादे नूपुरं मूर्ध्नि धार्यते ॥
चूँकि सेवकों तथा आभूषणों को यथास्थान स्थापित करना चाहिए। क्योंकि, शिखा-रत्न को पैर में या चरण-आभूषण को सिर पर नहीं पहना जाता है।
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