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हितोपदेश • अध्याय 3 • श्लोक 60
असेवके चानुरक्तिर्दानं सप्रियभाषणम् । सुरक्तेश्वरचिह्नानि दोषेऽपि गुणसंग्रहः ॥
सेवा न करने पर भी आसक्ति रखना, मीठी वाणी बोलकर दान देना और गलती होने पर भी अपने गुणों पर ध्यान देना - ये अच्छी तरह से आसक्त स्वामी के लक्षण हैं।
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