आकारैरिङ्गितैर्गत्या चेष्टया भाषणेन च ।
नेत्रवक्त्रविकारेण लक्ष्यतेऽन्तर्गतं मनः ॥
मनुष्य के आंतरिक विचार उसकी विशेषताओं, हाव-भाव, चाल-ढाल, क्रिया-कलाप, वाणी और आँखों तथा चेहरे की गति से प्रकट होते हैं।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
हितोपदेश के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
हितोपदेश के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।