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हितोपदेश • अध्याय 3 • श्लोक 164
अन्यच्च । वज्रं च राजतेजश्च द्वयमेवातिभीषणम् । एकमेकत्र पतति पतत्यन्यत्समन्ततः ॥
वज्र और राजसत्ता- ये दोनों अत्यंत भयानक हैं। एक तो एक जगह गिरता है, दूसरा चारों ओर अपना प्रभाव डालता है।
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