इसी प्रकार कहा भी गया है - किसी के गुण-दोष का निश्चय किये बिना उपकार या दण्ड देना नीति नहीं है। (ऐसा आचरण) किसी के विनाश की ओर ले जाता है जैसे घमंड के कारण साँप के मुँह में डाला गया हाथ।
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