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हितोपदेश • अध्याय 3 • श्लोक 134
अपरं च । स्वेदितो मर्दितश्चैव रज्जुभिः परिवेष्टितः । मुक्तो द्वादशभिर्वर्षैः श्वपुच्छः प्रकृतिं गतः ॥
एक कुत्ते की पूँछ, जिसे पसीने से तर करके, घिसकर और तार से बाँधकर सीधा बनाया गया था, बारह वर्षों के बाद भी मुक्त होने पर अपने स्वभाव में लौट आती है।
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