दमनको वदति -- देव स एव दोषः । यतः ।
यस्मिन्नेवाधिकं चक्षुरारोपयति पार्थिवः ।
सुतेऽमात्येऽप्युदासीने स लक्ष्म्याश्रीयते जनः ॥
दमनक ने उत्तर दिया - महाराज, यहीं दोष है। क्योंकि, जिस पर राजा की दृष्टि (दूसरों की अपेक्षा) अधिक होती है - चाहे वह पुत्र हो, या मंत्री हो, या पराया हो - उस पर धन की देवी का सहारा लिया जाता है।
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