मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
हितोपदेश • अध्याय 3 • श्लोक 105
मुहुर्नियोगिनः बाध्या वसुधारा महीपते । सकृत्किं पीडितं स्नानवस्त्रं मुञ्चेद्बहूदकम्॥
राजा को ऐसे अधिकारियों पर जुर्माना लगाना चाहिए जो बार-बार धन का दुरुपयोग करते हैं। भ्रष्ट अधिकारी बड़ी मात्रा में धन निकालते हैं। क्या स्नान के समय उपयोग किए जाने वाले वस्त्र केवल एक बार निचोड़ने पर बहुत अधिक पानी निकालते हैं?
पूरा ग्रंथ पढ़ें
हितोपदेश के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

हितोपदेश के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें