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हितोपदेश • अध्याय 3 • श्लोक 101
सदायत्यामसाध्यः स्यात्समृद्धः सर्व एव हि । सिद्धानामयमादेशः ऋद्धिश्चित्तविकारिणी ॥
सभी मंत्री जब महान हो जाते हैं तो अंततः असुधार्य होते हैं। सिद्धों (संतों, सिद्ध द्रष्टाओं) की यह कहावत है कि प्रचुरता मन को विकृत कर देती है।
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