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हितोपदेश • अध्याय 2 • श्लोक 90
यदशक्यं न त-च्छक्यं यच्छक्यं शक्यमेव तत् । नोदके शकटं याति न च नौर्गच्छति स्थले ॥
जो असंभव है वह कभी संभव नहीं हो सकता; और जो संभव है वह निश्चित रूप से संभव है। न तो गाड़ी पानी पर चल सकती है और न ही नाव जमीन पर चल सकती है।
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