मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
हितोपदेश • अध्याय 2 • श्लोक 85
अन्यच्च । तिरश्चामपि विश्वासो दृष्टः पुण्यैककर्मणाम् । सतां हि साधुशीलत्वात्स्वभावो न निवर्तते ॥
फिर विश्वास (एक दूसरे में) उन निचले जानवरों में भी देखा जाता है जिनके कार्य हमेशा (पूरी तरह से) अच्छे होते हैं, क्योंकि अच्छे का स्वभाव हमेशा उनकी जन्मजात अच्छाई के प्रति सच्चा रहता है (भिन्न नहीं होता)।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
हितोपदेश के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

हितोपदेश के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें