तभी सुबह होने पर कौए ने देखा कि खेत का मालिक हाथ में छड़ी लिये उसी ओर आ रहा है। उसे देखते ही कौवे ने कहा - मित्र हिरण, अपने आप को मरा हुआ समझो, अपने पेट को हवा से भर लो और अपने पैर अकड़कर ऐसे ही बने रहो। जब मैं हल्ला मचाऊं, तो तुम उठकर शीघ्र प्रस्थान करोगे। कौवे की बात मानकर हिरण उसी मुद्रा में रहा। अब खेत के मालिक ने हिरण को उस हालत में देखा, उसकी आँखें खुशी से चमक उठीं। "आह, तू तो अपने आप में ही मर गया" कहकर उसने उसे कैद से मुक्त कर दिया और अपना जाल इकट्ठा करने में लग गया। तभी कौवे की आवाज सुनकर हिरण तुरंत उठकर भाग गया, जबकि खेत के मालिक द्वारा उस पर (हिरण पर) फेंकी गई छड़ी से सियार की मौत हो गई। ऐसा कहा जाता है कि तीन साल, या तीन महीने, या तीन पखवाड़े, या (यहाँ तक कि) तीन दिनों में, एक व्यक्ति अपने अच्छे या बुरे कर्मों का फल अपने चरम पर पहुँचकर प्राप्त करता है।
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