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हितोपदेश • अध्याय 2 • श्लोक 82
दुर्जनः प्रियवादी च नैतद्विश्वासकारणम् । मधु तिष्ठति जिह्वाग्रे हृदि हालाहलं विषम् ॥
एक दुष्ट व्यक्ति मीठा बोलता है, इस कारण उस पर भरोसा नहीं किया जाना चाहिए। (क्योंकि) उसकी जीभ की नोक पर शहद होता है, लेकिन उसके दिल में सबसे घातक जहर होता है।
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