जो ईर्ष्या करता है, जो निन्दा करता है, जो सदैव असन्तुष्ट रहता है, जो क्रोधी है और जो सदैव शंकालु रहता है, जो दूसरे के भाग्य पर निर्भर रहता है - इन छः को अपने भाग्य में दुःख ही मिलता है।
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