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हितोपदेश • अध्याय 2 • श्लोक 24
तद्वचनं श्रुत्वा कश्चित्कपोतः सदर्पमाह -- आः किमेवमुच्यते । वृद्धानां वचनं ग्राह्यमापत्काले ह्युपस्थिते । सर्वत्रैवं विचारेण भोजनेप्यप्रवर्तनम् ॥
ये बातें सुनकर एक कबूतर ने अहंकारपूर्वक कहा - अरे, ऐसा क्यों कहा जाता है? विपत्ति का समय आने पर ही वृद्धों की बात (सलाह) पर अमल (पालन) करना चाहिए। यदि हम सभी मामलों में इस प्रकार विचार करें, तो हम शायद ही अपना भोजन लेने के लिए आगे बढ़ सकते हैं।
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