न मातरि न दारेषु न सोदर्ये न चात्मजे ।
विश्वासस्तादृशः पुंसां यादृङ्मित्रे स्वभावजे ॥
पुरुषों को माँ, पत्नी, भाई या बेटे पर वह भरोसा नहीं होता, जो स्वाभाविक स्वभाव के मित्र पर होता है।
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