मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
हितोपदेश • अध्याय 2 • श्लोक 183
तथा हि । जन्मनि क्लेशबहुले किं नु दुःखमतः परम् । इच्छासम्पद्यतो नास्ति यच्चेच्छा न निवर्तते ॥
उसी प्रकार जिस जीवन में कष्टों की बहुतायत हो, उसमें इससे बड़ा दुख क्या हो सकता है कि इच्छा के अनुरूप धन न मिले और फिर भी इच्छा हो?
पूरा ग्रंथ पढ़ें
हितोपदेश के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

हितोपदेश के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें