मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
हितोपदेश • अध्याय 2 • श्लोक 170
को वीरस्य मनस्विनः स्वविषयः को वा विदेशस्तथा यं देशं श्रयते तमेव कुरुते बाहुप्रतापार्जितम् । यद्दंष्ट्रानखलाङ्गुलप्रहरणः सिंहो वनं गाहते तस्मिन्नेव हतद्विपेन्द्ररुधिरैअस्तृष्णां छिनत्त्यात्मना ॥
उच्च विचार वाले नायक के लिए क्या अपना और क्या पराया? वह जिस देश का सहारा लेता है, उसी देश को अपनी भुजाओं के बल से प्राप्त कर लेता है। अपने जबड़ों, पंजों और पूँछ से सुसज्जित सिंह जिस भी जंगल में प्रवेश करता है, उसी जंगल में वह जिन हाथीयों को मारता है उनके खून से अपनी प्यास बुझाता है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
हितोपदेश के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

हितोपदेश के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें