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हितोपदेश • अध्याय 2 • श्लोक 15
अन्यच्च । मातृवत्परदारेषु परद्रव्येषु लोष्टवत् । आत्मवत्सर्वभूतेषु यः पश्यति स पण्डितः ॥
साथ ही, जो दूसरे की पत्नी को माता के समान, दूसरे के धन को मिट्टी के ढेले के समान और सभी प्राणियों को अपनी आत्मा के समान देखता है, वह (वास्तव में) बुद्धिमान व्यक्ति है।
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