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हितोपदेश • अध्याय 2 • श्लोक 146
तदत्रावस्थोचितकार्यपरिच्छेदः श्रेयान् । को धर्मो भूतदया किं सौख्यमरोगिता जगति जन्तोः । कः स्नेहः सद्भावः किं पाण्डित्यं परिच्छेदः ॥
इसलिए यह उचित होगा कि यह निर्णय लिया जाए कि वर्तमान परिस्थितियों में क्या करना है। इस संसार में मनुष्य का (सच्चा) कर्तव्य क्या है? प्राणियों के प्रति दया। (वास्तविक) ख़ुशी क्या है? स्वास्थ्य (शाब्दिक रूप से बीमारी से मुक्ति)। स्नेह क्या है? अच्छा लगना। और बुद्धि क्या है? फ़ैसला।
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