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हितोपदेश • अध्याय 2 • श्लोक 144
अपि च । असेवितेश्वरद्वारमदृष्टविरहव्यथम् । अनुक्तक्लीबवचनं धन्यं कस्यापि जीवनम् ॥
फिर, धन्य है किसी ऐसे व्यक्ति का जीवन, जिसमें धनवानों का द्वार न देखा गया हो, जिसमें वियोग की पीड़ा का अनुभव न किया गया हो और जिसमें करुण शब्द न बोले गए हों।
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