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हितोपदेश • अध्याय 2 • श्लोक 114
अपरं च । पानं दुर्जनसंसर्गः पत्या च विरहोऽटनम् । स्वप्नश्चान्यगृहे वासो नारीणां दूषणानि षट् ॥
इसके अलावा शराब पीना, बुरे पुरुषों की संगति करना, पति से अलग होना, इधर-उधर घूमना, सोना और दूसरे के घर में रहना - ये छह स्त्री को बिगाड़ देते हैं।
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