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हितोपदेश • अध्याय 1 • श्लोक 7
विद्या शस्त्रस्य शास्त्रस्य द्वे विद्ये प्रतिपत्तये । आद्या हास्याय वृद्धत्वे द्वितीयाद्रियते सदा ॥
शस्त्रों का ज्ञान और शास्त्रों का ज्ञान - ये दो विद्याएँ महिमा प्रदान करती हैं, लेकिन पहली विद्या बुढ़ापे में उपहास का पात्र बनती है, जबकि दूसरी विद्या हमेशा सम्मानित होती है।
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