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हितोपदेश • अध्याय 1 • श्लोक 44
अन्यच्च । अस्मिंस्तु निर्गुणं गोत्रे नापत्यमुपजायते । आकरे पद्मरागानां जन्म काचमणेः कुतः ॥
और यह दूसरी बात - इस (शाही) परिवार में गुणहीन बच्चा पैदा नहीं हो सकता; माणिक की खान में कांच का टुकड़ा कहाँ से उत्पन्न हो सकता है?
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