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हितोपदेश • अध्याय 1 • श्लोक 33
तथा च । पूर्वजन्मकृतं कर्म तद्दैवमिति कथ्यते । तस्मात् पुरुषकारेण यत्नं कुर्यादतन्द्रितः ॥
जिसे भाग्य कहा जाता है वह (लेकिन) पिछले जीवन में (किसी के) कार्यों का योग है; इसलिए व्यक्ति को आलस्य रहित होकर पुरुषार्थपूर्वक प्रयास करना चाहिए।
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