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हठयोग प्रदीपिका • अध्याय 4 • श्लोक 66
शरी-आदिनाथेन स-पाद-कोटि- लय-परकाराः कथिता जयन्ति | नादानुसन्धानकमेकमेव मन्यामहे मुख्यतमं लयानाम ||
दीनाथ ने समाधि की 1 1/4 करोड़ विधियाँ प्रतिपादित कीं, और वे सभी प्रचलित हैं। इनमें से अनाहत नाद का श्रवण ही एकमात्र, मेरे विचार से प्रमुख है।
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