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हठयोग प्रदीपिका • अध्याय 4 • श्लोक 62
जञेय-वस्तु-परित्यागाद्विलयं याति मानसम | मनसो विलये जाते कैवल्यमवशिष्ह्यते ||
ज्ञेय को हटा देने से मन लुप्त हो जाता है और उसके लुप्त होने पर आत्मा ही पीछे रह जाती है।
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