यह सारा चल-अचल संसार मन है। जब मन ने मानवी अवस्था को प्राप्त कर लिया है, तो कोई द्वैत नहीं है (मन के कार्य की अनुपस्थिति से।)
पूरा ग्रंथ पढ़ें
हठयोग प्रदीपिका के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
हठयोग प्रदीपिका के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।