यदा संक्ष्हीयते पराणो मानसं छ परलीयते |
तदा समरसत्वं छ समाधिरभिधीयते ||
जब प्राण क्षीण (ऊर्जाहीन) हो जाते हैं और मन लीन हो जाता है, तो उनका समान होना समाधि कहलाता है।
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