अथ खेछरी
सव्य-दक्ष्हिण-नाडी-सथो मध्ये छरति मारुतः |
तिष्ह्ठते खेछरी मुद्रा तस्मिन्स्थाने न संशयः ||
जब वायु दायें और बायें नथुनों में चलना बन्द कर दे और मध्य मार्ग में बहने लगे, तब वहाँ खेचरी मुद्रा सिद्ध हो सकती है। इसमें कोई शक नहीं है।
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