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हठयोग प्रदीपिका • अध्याय 4 • श्लोक 42
दिवा न पूजयेल्लिङ्गं रात्रौ छैव न पूजयेत | सर्वदा पूजयेल्लिङ्गं दिवारात्रि-निरोधतः ||
दिन में (अर्थात जब सूर्य या पिंगला काम कर रहे हों) या रात में (जब इड़ा काम कर रही हो) लिंग (अर्थात् आत्मा) का ध्यान नहीं करना चाहिए, लेकिन दोनों को रोककर हमेशा चिंतन करना चाहिए।
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